अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला मजबूत सपोर्ट
सोने की कीमतों में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर सोना रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास ट्रेड कर रहा है। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सेफ हेवन एसेट यानी सोने की ओर मजबूती से मोड़ा है।
डॉलर की कमजोरी ने दी तेजी को हवा
अमेरिकी डॉलर में हालिया कमजोरी भी सोने की कीमतों को सपोर्ट कर रही है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना अन्य मुद्राओं में सस्ता पड़ता है, जिससे उसकी मांग बढ़ जाती है। इसी वजह से वैश्विक निवेशक सोने में जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी
भारत, चीन और कई अन्य देशों के केंद्रीय बैंक पिछले कुछ महीनों से लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं। इस भारी खरीदारी से बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और कीमतों को मजबूती मिली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेंड अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा।
महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता
दुनिया के कई देशों में महंगाई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। साथ ही ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि आगे कटौती होगी या नहीं। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर सोना काफी ऊपर पहुंच चुका है, इसलिए एकमुश्त निवेश से बचना बेहतर होगा। जो निवेशक लंबे समय के लिए सोने में निवेश करना चाहते हैं, वे गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं।
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आगे क्या 1.60 लाख तक जाएगा सोना?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहते हैं और डॉलर में कमजोरी जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में सोना 1.60 लाख रुपये के स्तर को भी छू सकता है। हालांकि, बीच-बीच में मुनाफावसूली से गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
आज सोने का 1 लाख 50 हजार के पार जाना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक हालात, निवेशकों की बदलती सोच और बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है। आने वाले दिन सोने के बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।